आग लगा दो किताबों मे,जला दो विध्यालयों को।।


सन् 1835 में लार्ड मैकाले ने ब्रिटिश संसद में दिये गये बयान में कहा था। कि भारत की साक्षरता 87% से 97% है । PTR भी 1950 में 20 विध्यार्थियों पर एक शिक्षक था।
आज विश्व साक्षरता 86% , जब कि भारत की साक्षरता 76% है , जब कि स्नातको की संख्या 8.15% है । PTR , सरकार द्वारा 30:1 निर्धारित है और देश के 70% तक विद्यालय इस म‍ानक में असफल है । 
दुनिया के top 500 यूनीवर्सिटीज में भारत के सिर्फ़ 3 यूनीवर्सिटी है ,वो भी top 275 के बाद । 90 % IIT,IIM,AIIMS के छात्र विदेश चले जाते है क्यों कि इन संस्थाओं का संचालन परोक्ष रुप से अमेरिका होता है । अमेरिका फण्ड के बहाने अपनी आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रम बनवाते है ,ऐसा पाठ्यक्रम जिसका भारत में 80% तक कोई उपयोग नहीं है ,मतलव हमारे ये top के संस्थान विदेशों के लिये प्रतिभा तैयार करने की फैक्ट्री है । 
क्यों शिक्षा पर पैसे खर्च नहीं किये जाते? 
हमरी गवर्नमेंट ने शिक्षा का बजट 4.15% से घटाकर 3.85% कर दिया है क्यों ? और बातें देश को विश्वगुरु बनाने की, की जा रहीं है ।
प्रतीत होता है , इस देश मे पढ़ना - लिखना जैसे कोई अपर‍ाध हो। शिक्षित बेरोजगारों की संख्या , अशिक्षित से कई गुनाह ज्यादा है । एवं शिक्षित की आमदनी अनपढ़ से कम है । आखिर शिक्षा का क्या उद्देश्य है ? हमें क्या पढ़ाया जा रहा है ? क्यों पढ़ाया जा रहा है ?हमारी सरकार हमें कहाँ ले जाना चाहती है ? शिक्षा से इतना भय क्यों है सरकार को??
आशा सगठन

आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA) 
चलो आशा के साथ
Ravi Pal - (9761880779)
Follow Us on FB: https://www.facebook.com/aashasangathan/


Report Abuse     Posted By Ravi Pal
©2014 News Liner. All rights reserved - Terms of Use | Privacy Policy | Help
Dessigned By The Colour Moon
social share buttons code